मुक्तक वृन्द - "सृजन वन" - श्रेयस्कर
मेरे हिंदी कविता सृजन वन में आपका स्वागत है। सृजन वन हिंदी साहित्य में अति प्रचलित मुक्त छंद अर्थात मुक्तक का एक अथाह मंडल है। यहाँ मैं आप सभी के साथ अपनी कृतियाँ साझा करता रहूँगा। शुभमस्तु।
Sunday, April 13, 2014
सरासर खोखले रिश्तों के बूते घर नहीं होते
"जहाँ पर प्यार कम हो वो हसीँ मंज़र नहीं होते,
सरासर खोखले रिश्तों के बूते घर नहीं होते।
मुरलिया थामकर सदियों से जो बैठे हैं मंदिर में,
दिल की आँखों से देखो वो महज़ पत्थर नहीं होते। "
सरासर खोखले रिश्तों के बूते घर नहीं होते।
मुरलिया थामकर सदियों से जो बैठे हैं मंदिर में,
दिल की आँखों से देखो वो महज़ पत्थर नहीं होते। "
Monday, March 31, 2014
कि मुझको हर नज़र लगने से पहले प्यार करती है
"ना कोई रात है ऐसी कि जो तन्हा गुजरती है,
उन्ही के साथ से ये ज़िन्दगी हर पल सँवरती है।
मेरे माँ बाप की हर एक दुआ, जादू है कुछ ऐसा,
कि मुझको हर नज़र लगने से पहले प्यार करती है। "
उन्ही के साथ से ये ज़िन्दगी हर पल सँवरती है।
मेरे माँ बाप की हर एक दुआ, जादू है कुछ ऐसा,
कि मुझको हर नज़र लगने से पहले प्यार करती है। "
Sunday, November 2, 2008
कि तुमने जो कहा मैं वो समझ पाया नही
"समस्याएं सुलझ पाती नही बस इसलिए,
कि तुमने जो कहा मैं वो समझ पाया नही।
मुझे तुमसे शिकायत है क्या जाने तुमने क्यों,
कहा जो भी मुझे कुछ भी तो समझाया नही।"
कि तुमने जो कहा मैं वो समझ पाया नही।
मुझे तुमसे शिकायत है क्या जाने तुमने क्यों,
कहा जो भी मुझे कुछ भी तो समझाया नही।"
खुदा की उनसे हर चुप्पी भी कोई बात ही होगी
"भले नाराज हो जाए गगन बरसात ही होगी,
भले आंधी चले दिन में सुहानी रात ही होगी।
विपत्ति में बिना घबराए जो चलते हैं बाशिंदे,
खुदा की उनसे हर चुप्पी भी कोई बात ही होगी।"
भले आंधी चले दिन में सुहानी रात ही होगी।
विपत्ति में बिना घबराए जो चलते हैं बाशिंदे,
खुदा की उनसे हर चुप्पी भी कोई बात ही होगी।"
Thursday, April 24, 2008
मेरा घर छोड़कर सारे शहर बरसात होती है।
"शहर में रोज दीवाली मेरे घर रात होती है,
मेरा घर छोड़कर सारे शहर बरसात होती है।
मेरे ही भाग्य में रोना लिखा था क्या मेरे यारों?
मयस्सर हर खुशी तुमको भी तो दिन रात होती है।"
मेरा घर छोड़कर सारे शहर बरसात होती है।
मेरे ही भाग्य में रोना लिखा था क्या मेरे यारों?
मयस्सर हर खुशी तुमको भी तो दिन रात होती है।"
Friday, March 7, 2008
तब इस मीठे मधुमास में मेरा गीत झूमकर गाता है
"जब पायल ठुमके, कंगना खनके झुमका कुछ इतराता है,
जब प्रियतम की पदचाप से भी संगीत उभरकर आता है।
जब दूर कहीं अम्बर धरती से मिलने पर इतराता है,
तब इस मीठे मधुमास में मेरा गीत झूमकर गाता है। "
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