Sunday, April 13, 2014

मुक्तक वृन्द - "सृजन वन" - श्रेयस्कर : सरासर खोखले रिश्तों के बूते घर नहीं होते

मुक्तक वृन्द - "सृजन वन" - श्रेयस्कर : सरासर खोखले रिश्तों के बूते घर नहीं होते

सरासर खोखले रिश्तों के बूते घर नहीं होते

"जहाँ पर प्यार कम हो वो हसीँ मंज़र नहीं होते,
सरासर खोखले रिश्तों के बूते घर नहीं होते।
मुरलिया थामकर सदियों से जो बैठे हैं मंदिर में,
दिल की आँखों से देखो वो महज़ पत्थर नहीं होते। "

Monday, March 31, 2014

कि मुझको हर नज़र लगने से पहले प्यार करती है

"ना कोई रात है ऐसी कि जो तन्हा गुजरती है,
उन्ही के साथ से ये ज़िन्दगी हर पल सँवरती है।
मेरे माँ बाप की हर एक दुआ, जादू है कुछ ऐसा,
कि मुझको हर नज़र लगने से पहले प्यार करती है। "

Sunday, November 2, 2008

कि तुमने जो कहा मैं वो समझ पाया नही

"समस्याएं सुलझ पाती नही बस इसलिए,
कि तुमने जो कहा मैं वो समझ पाया नही।
मुझे तुमसे शिकायत है क्या जाने तुमने क्यों,
कहा जो भी मुझे कुछ भी तो समझाया नही।"

खुदा की उनसे हर चुप्पी भी कोई बात ही होगी

"भले नाराज हो जाए गगन बरसात ही होगी,
भले आंधी चले दिन में सुहानी रात ही होगी।
विपत्ति में बिना घबराए जो चलते हैं बाशिंदे,
खुदा की उनसे हर चुप्पी भी कोई बात ही होगी।"

Thursday, April 24, 2008

मेरा घर छोड़कर सारे शहर बरसात होती है।

"शहर में रोज दीवाली मेरे घर रात होती है,
मेरा घर छोड़कर सारे शहर बरसात होती है।
मेरे ही भाग्य में रोना लिखा था क्या मेरे यारों?
मयस्सर हर खुशी तुमको भी तो दिन रात होती है।"

Friday, March 7, 2008

तब इस मीठे मधुमास में मेरा गीत झूमकर गाता है

"जब पायल ठुमके, कंगना खनके झुमका कुछ इतराता है,
जब प्रियतम की पदचाप से भी संगीत उभरकर आता है।
जब दूर कहीं अम्बर धरती से मिलने पर इतराता है,
तब इस मीठे मधुमास में मेरा गीत झूमकर गाता है। "