"जहाँ पर प्यार कम हो वो हसीँ मंज़र नहीं होते,
सरासर खोखले रिश्तों के बूते घर नहीं होते।
मुरलिया थामकर सदियों से जो बैठे हैं मंदिर में,
दिल की आँखों से देखो वो महज़ पत्थर नहीं होते। "
सरासर खोखले रिश्तों के बूते घर नहीं होते।
मुरलिया थामकर सदियों से जो बैठे हैं मंदिर में,
दिल की आँखों से देखो वो महज़ पत्थर नहीं होते। "
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