मेरे हिंदी कविता सृजन वन में आपका स्वागत है। सृजन वन हिंदी साहित्य में अति प्रचलित मुक्त छंद अर्थात मुक्तक का एक अथाह मंडल है। यहाँ मैं आप सभी के साथ अपनी कृतियाँ साझा करता रहूँगा। शुभमस्तु।
Sunday, April 13, 2014
सरासर खोखले रिश्तों के बूते घर नहीं होते
"जहाँ पर प्यार कम हो वो हसीँ मंज़र नहीं होते,
सरासर खोखले रिश्तों के बूते घर नहीं होते।
मुरलिया थामकर सदियों से जो बैठे हैं मंदिर में,
दिल की आँखों से देखो वो महज़ पत्थर नहीं होते। "
सरासर खोखले रिश्तों के बूते घर नहीं होते।
मुरलिया थामकर सदियों से जो बैठे हैं मंदिर में,
दिल की आँखों से देखो वो महज़ पत्थर नहीं होते। "
Monday, March 31, 2014
कि मुझको हर नज़र लगने से पहले प्यार करती है
"ना कोई रात है ऐसी कि जो तन्हा गुजरती है,
उन्ही के साथ से ये ज़िन्दगी हर पल सँवरती है।
मेरे माँ बाप की हर एक दुआ, जादू है कुछ ऐसा,
कि मुझको हर नज़र लगने से पहले प्यार करती है। "
उन्ही के साथ से ये ज़िन्दगी हर पल सँवरती है।
मेरे माँ बाप की हर एक दुआ, जादू है कुछ ऐसा,
कि मुझको हर नज़र लगने से पहले प्यार करती है। "
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